गर्भवती महिलाएँ गर्भावस्था के दौरान अपनी सामान्य गतिविधियाँ कर सकती हैं, लेकिन केवल पहली तिमाही और अंतिम 4 सप्ताह में अत्यधिक और तनावपूर्ण काम से बचना चाहिए।
चिकित्सा या प्रसूति संबंधी जटिलताओं की अनुपस्थिति में, गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से मध्यम व्यायाम करना चाहिए।
इस समय पर कब्ज़ आम होता हैँ।
उन्हें रोज नहाना चाहिएँ।
एक ठीक तरह से छाती पर बैठने वाली ब्रा गर्भावस्था के दौरान संलग्न (बढ़े हुए) स्तन को राहत दे सकती है।
सामान्यतः यौनक्रिया गर्भावस्था के दौरान मना नहीं है। लेकिन, जिन महिलाओं में गर्भपात या समय के पहले प्रसव का खतरा हो, उन्हें यौनक्रिया से वर्जन (परहेज) करना चाहिए।
इन के कारण कम वजन के बच्चे, भ्रूण का विकृत होना, एकाएक शिशु मृत्यु (एस.आई.डी.एस.) और मृतजन्म होता है।
किसी भी प्रकार का तनाव माँ में चिंता, उदासी, अकेलेपन का कारण बन सकता है। परिवार को घर का माहौल सकारात्मक और सुरक्षित बनाना चाहिए और घरेलू हिंसा नहीं होना चाहिए।
माँ को शारीरिक और भावनात्मक रूप से स्तनपान कराने के लिए तैयार करना चाहिए। बच्चे के पैदा होने से पहले ही स्तन के अगले भाग (निप्पल) की किसी भी समस्या का प्रबंधन किया जाना चाहिए।
मातृ टीकाकरण गर्भावस्था के दौरान दिया जाने वाला टीका है। यह गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के लिए निवारक स्वास्थ्य देखभाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण में न केवल माताओं को टीके से रोके जा सकने वाले रोगों से बचाने की अपार क्षमता है, बल्कि उनके भ्रूण और शिशु को भी सक्रिय बचपन के टीकाकरण के माध्यम से स्वयं सुरक्षा प्राप्त करने से पहले ही सुरक्षात्मक एंटीबॉडी के निष्क्रिय अधिग्रहण के माध्यम से सुरक्षित रखने की क्षमता है।